दंतेवाड़ा 25 सितंबर 2024। इसमें कोई दो राय नहीं है कि शासन की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से विगत वर्षो में दूरस्थ वनांचलों में निवासरत पिछड़े एवं वंचित समुदाय को पक्के मकानों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सदैव ही कच्चे मकानों में रहने वाले इन वर्गो के लिए एक पक्के मकान में रहना एक दिवास्वप्न ही रहा है। इसके मद्देनजर प्रधानमंत्री आवास योजना के सफल क्रियान्वयन ने इनके पक्के मकान में रहने के स्वप्न को साकार किया है साथ ही साथ इनके सामाजिक एवं आर्थिक स्तर को ऊंचा उठाने में प्रमुख भूमिका निभाई है।
दंतेवाड़ा जिले के सभी विकास खंडों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उल्लेखनीय कार्य किये जा रहे है इस क्रम में विकास खण्ड गीदम के ग्राम पंचायत गुमड़ा की महिला हितग्राही सुंदरा, बाई (स्व.जगत) को भी प्रधानमंत्री आवास योजना ने नये मकान की सौगात दी है। एक अत्यंत गरीब कृषक परिवार से आने वाली पटेलपारा निवासी सुंदरा बाई अपने परिवार के जीवन यापन के लिए कृषि एवं मजदूरी पर निर्भर रही है और तो और पति के असमय मृत्यु होने हो जाने से घर एवं एकमात्र पुत्री की सम्पूर्ण जिम्मेदारी एका एक सुंदरा बाई के कंधे पर आ गई। जाहिर है घर में अन्य पुरुष सदस्य न होने एवं खेती से जीवन यापन हेतु पर्याप्त आय नहीं होने के कारण इस परिवार के लिए पक्के मकान की कल्पना करना बेमानी रहा और वह जर्जर, कच्चे पुराने घर में निवास करना उनकी नियति रही।
इन्हीं कठिनाइयों के बीच सुंदरा बाई के लिए समय ने करवट बदला और भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के माध्यम से सुंदरा बाई को आवास की स्वीकृति प्राप्त होने के उपरान्त उसे उसके पक्के मकान का सपना साकार होने की उम्मीद फिर से जागने लगी। जिसे पूर्ण करने में सुंदरा बाई के पिता एवं भाईयों ने भी हरसंभव सहायता दिया। इस क्रम में योजना के तहत सुंदरा बाई को मकान निर्माण के लिए 130000 शौचालय के लिए 12000 तथा मनरेगा के तहत 95 दिवस की मजदूरी की राशि 16435.00 द्वारा सुंदरा बाई को उसके बैंक खाते में स्थानांतरित की गयी। इसके अलावा आवास के अतिरिक्त उज्जवला योजना अंतर्गत रसोई गैस भी शासन द्वारा प्रदान किया गया। और अब वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास के बन जाने के बाद सुंदरा बाई अपने परिवार के साथ सामाजिक एवं आर्थिक स्तर में सकारात्मक बदलाव महसूस कर रही है।
सुंदरा बाई जैसे हजारों हितग्राही है जो विषम परिस्थितियों के बीच अपने निर्धनता के कारण मकान न बना सकने के विवशता को झेल रहे थे उनके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना निःसंदेह एक वरदान साबित हुई है और इसके लिए सुंदरा बाई ने शासन प्रशासन को साधुवाद दिया है। क्योंकि आखिरकार उसके स्वर्गीय पति के साथ संजोया गया स्वयं के पक्के आवास का सपना पूर्ण हो गया।










